मुंबई / नई दिल्ली
: रुपए के चिन्ह को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद अब इसे सॉफ्टवेयर शब्दकोष और कंप्यूटर कीबोर्ड में शामिल करने की मुहिम शुरू हो गई है। सेलफोन में भी इस प्रतीक को शामिल करने की जरूरत होगी। इससे रुपए के प्रतीक को जल्दी ग्लोबल पहचान दिलाने में मदद मिलेगी। माइक्रोसॉफ्ट सहित अन्य सॉफ्टवेयर वेंडर अपने ऑपरेटिंग सिस्टम में छोटा बदलाव करने को तैयार हैं, लेकिन इससे ही उनके सॉफ्टवेयर शब्दकोष में एक नया सिंबल जुड़ जाएगा।
दुनिया में कंप्यूटर यूजर्स रुपए के चिन्ह को एक ही बटन (कीस्ट्रोक) से लिख सकेंगे या कुछ कीस्ट्रोक को मिलाकर यह लिखा जा सकेगा। रेड हैट (इंडिया) के डायरेक्टर (सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग) सतीश मोहन का कहना है, 'रुपए के प्रतीक के लिए हमें बहुत कम मेमरी स्पेस की जरूरत होगी।' रेड हैट लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम डिस्ट्रीब्यूट करता है। दुनिया भर के 90 फीसदी से अधिक पीसी में पहले से ही माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज ओएस का इस्तेमाल किया जाता है। माइक्रोसॉफ्ट भी स्थानीय जरूरतों के मुताबिक बदलाव करने से इनकार नहीं कर रही है। कंपनी पहले ही विंडोज एक्सपी के लिए हिंदी, मलयालम, मराठी और तमिल में सपोर्ट मुहैया कराती है।
माइक्रोसॉफ्ट का ताजा ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज विस्टा 12 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसके लिए कीबोर्ड का स्थानीयकरण किया गया है, इसमें फॉन्ट, शेपिंग और स्थानीय भाषाओं के कैरेक्टर का सपोर्ट शामिल है। पीसी बनाने वाली एचपी और एचसीएल जैसी कंपनियां नए इक्विपमेंट को पेश करने की तैयारी में लगी हैं। पीसी बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी घरेलू कंपनी एचसीएल इंफोसिस्टम्स के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट जॉर्ज पॉल का कहना है, 'नए कीबोर्ड में रुपए के प्रतीक को शामिल किया जाएगा।' सरकार के इस कदम से नए कारोबार की संभावनाएं पैदा हुई हैं।
कीबोर्ड और प्रिंटर का आकर्षक बाजार है। जब कीबोर्ड में रुपए के नए चिन्ह को शामिल करने पर हार्डवेयर वेंडरों को बैंक, ब्रोकरेज और बीमा कंपनियों जैसे कारोबार से बड़े पैमाने पर आईटी इक्विपमेंट के नए ऑर्डर मिलेंगे। हैंडसेट कंपनियां भी इस बदलाव को स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सैमसंग इंडिया के डायरेक्टर (मोबाइल और आईटी) रंजीत यादव का कहना है, 'मोबाइल कंपनियों के लिए हैंडसेट में रुपए का प्रतीक शामिल करना लॉजिकल कदम होगा।'
एचटीसी मोबाइल एंड इंटेक्स टेक्नोलॉजीज (इंडिया) के हैंडसेट में भी रुपए के चिन्ह को लाने की तैयारी शुरू हो गई है। एचटीसी मोबाइल के कंट्री हेड अजय शर्मा का कहना है, 'हम भारतीय ग्राहकों के लिए कस्टमाइज्ड हैंडसेट लॉन्च करने की दिशा में काम कर रहे हैं। रुपए के चिन्ह को शामिल करना आकर्षक होगा। हम इसे लेकर उत्साहित हैं।'कोई बड़ी तकनीकी चुनौती नहींएक बार जब ऑपरेटिंग सिस्टम वेंडर रुपए के प्रतीक को शामिल करेंगे, उसके साथ ही यह टेक र्वल्ड में इसकी पहुंच बन जाएगी। जब जरूरी बटन या कुछ बटनों के समूह को दबाया जाएगा, तब कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम खुद इस चिन्ह की पहचान कर लेगा। इसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए यूनीक नंबर तय किया जाएगा, जो कंप्यूटिंग इंडस्ट्री के स्टैंडर्ड यूनिकोड को सुनिश्चित करता है।
यूनिकोड के शब्दकोष में 1,07,000 कैरेक्टर हैं।गूगल नए चिन्ह को वेब सपोर्ट मुहैया कराने में कोई खास चुनौती नहीं देख रहा है। गूगल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश राव का कहना है, 'हमारे सभी वेब प्रोडक्ट को वेब कंटेंट में बदलाव को स्वीकार करने के लिए तैयार किया गया है।' यूनिकोड कंसोशिर्यम में भारत का प्रतिनिधित्व टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फॉर इंडियन लैंग्वेज (टीडीआईएल) करता है। टीडीआईएल सूचना तकनीक मंत्रालय के अंतर्गत आता है। एक बार जब कंसोशिर्यम को चिन्ह सौंप दिया जाएगा, तब इसे इजाजत मिलने में छह महीने से लेकर एक साल तक लग सकते हैं। रेड हैट के मोहन का कहना है, 'तकनीकी दृष्टिकोण से यह कोई बड़ी चुनौती नहीं है। ऑपरेटिंग सिस्टम के पास बहु मुदा को सपोर्ट करने वाले फंक्शन मौजूद हैं।'
नैस्कॉम सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट करने वाली कंपनियों को अपने ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर में इस नए चिन्ह को नए प्रोग्राम की तरह स्वीकार करने के लिए प्रेरित करेगा। उधर जेनिथ कंप्यूटर्स के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर देविता श्रॉफ का कहना है, 'यह सॉफ्टवेयर का मुद्दा है, न कि हार्डवेयर का। एक बार इसके तय हो जाने के बाद हम अपने प्रोडक्ट को मांग के मुताबिक बाजार में उतारेंगे।'
दुनिया में कंप्यूटर यूजर्स रुपए के चिन्ह को एक ही बटन (कीस्ट्रोक) से लिख सकेंगे या कुछ कीस्ट्रोक को मिलाकर यह लिखा जा सकेगा। रेड हैट (इंडिया) के डायरेक्टर (सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग) सतीश मोहन का कहना है, 'रुपए के प्रतीक के लिए हमें बहुत कम मेमरी स्पेस की जरूरत होगी।' रेड हैट लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम डिस्ट्रीब्यूट करता है। दुनिया भर के 90 फीसदी से अधिक पीसी में पहले से ही माइक्रोसॉफ्ट का विंडोज ओएस का इस्तेमाल किया जाता है। माइक्रोसॉफ्ट भी स्थानीय जरूरतों के मुताबिक बदलाव करने से इनकार नहीं कर रही है। कंपनी पहले ही विंडोज एक्सपी के लिए हिंदी, मलयालम, मराठी और तमिल में सपोर्ट मुहैया कराती है।
माइक्रोसॉफ्ट का ताजा ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज विस्टा 12 भारतीय भाषाओं को सपोर्ट करता है। इसके लिए कीबोर्ड का स्थानीयकरण किया गया है, इसमें फॉन्ट, शेपिंग और स्थानीय भाषाओं के कैरेक्टर का सपोर्ट शामिल है। पीसी बनाने वाली एचपी और एचसीएल जैसी कंपनियां नए इक्विपमेंट को पेश करने की तैयारी में लगी हैं। पीसी बनाने वाली भारत की सबसे बड़ी घरेलू कंपनी एचसीएल इंफोसिस्टम्स के एग्जिक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट जॉर्ज पॉल का कहना है, 'नए कीबोर्ड में रुपए के प्रतीक को शामिल किया जाएगा।' सरकार के इस कदम से नए कारोबार की संभावनाएं पैदा हुई हैं।
कीबोर्ड और प्रिंटर का आकर्षक बाजार है। जब कीबोर्ड में रुपए के नए चिन्ह को शामिल करने पर हार्डवेयर वेंडरों को बैंक, ब्रोकरेज और बीमा कंपनियों जैसे कारोबार से बड़े पैमाने पर आईटी इक्विपमेंट के नए ऑर्डर मिलेंगे। हैंडसेट कंपनियां भी इस बदलाव को स्वीकार करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। सैमसंग इंडिया के डायरेक्टर (मोबाइल और आईटी) रंजीत यादव का कहना है, 'मोबाइल कंपनियों के लिए हैंडसेट में रुपए का प्रतीक शामिल करना लॉजिकल कदम होगा।'
एचटीसी मोबाइल एंड इंटेक्स टेक्नोलॉजीज (इंडिया) के हैंडसेट में भी रुपए के चिन्ह को लाने की तैयारी शुरू हो गई है। एचटीसी मोबाइल के कंट्री हेड अजय शर्मा का कहना है, 'हम भारतीय ग्राहकों के लिए कस्टमाइज्ड हैंडसेट लॉन्च करने की दिशा में काम कर रहे हैं। रुपए के चिन्ह को शामिल करना आकर्षक होगा। हम इसे लेकर उत्साहित हैं।'कोई बड़ी तकनीकी चुनौती नहींएक बार जब ऑपरेटिंग सिस्टम वेंडर रुपए के प्रतीक को शामिल करेंगे, उसके साथ ही यह टेक र्वल्ड में इसकी पहुंच बन जाएगी। जब जरूरी बटन या कुछ बटनों के समूह को दबाया जाएगा, तब कोई भी ऑपरेटिंग सिस्टम खुद इस चिन्ह की पहचान कर लेगा। इसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए यूनीक नंबर तय किया जाएगा, जो कंप्यूटिंग इंडस्ट्री के स्टैंडर्ड यूनिकोड को सुनिश्चित करता है।
यूनिकोड के शब्दकोष में 1,07,000 कैरेक्टर हैं।गूगल नए चिन्ह को वेब सपोर्ट मुहैया कराने में कोई खास चुनौती नहीं देख रहा है। गूगल इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर शैलेश राव का कहना है, 'हमारे सभी वेब प्रोडक्ट को वेब कंटेंट में बदलाव को स्वीकार करने के लिए तैयार किया गया है।' यूनिकोड कंसोशिर्यम में भारत का प्रतिनिधित्व टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फॉर इंडियन लैंग्वेज (टीडीआईएल) करता है। टीडीआईएल सूचना तकनीक मंत्रालय के अंतर्गत आता है। एक बार जब कंसोशिर्यम को चिन्ह सौंप दिया जाएगा, तब इसे इजाजत मिलने में छह महीने से लेकर एक साल तक लग सकते हैं। रेड हैट के मोहन का कहना है, 'तकनीकी दृष्टिकोण से यह कोई बड़ी चुनौती नहीं है। ऑपरेटिंग सिस्टम के पास बहु मुदा को सपोर्ट करने वाले फंक्शन मौजूद हैं।'
नैस्कॉम सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट करने वाली कंपनियों को अपने ऑपरेटिंग सॉफ्टवेयर में इस नए चिन्ह को नए प्रोग्राम की तरह स्वीकार करने के लिए प्रेरित करेगा। उधर जेनिथ कंप्यूटर्स के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर देविता श्रॉफ का कहना है, 'यह सॉफ्टवेयर का मुद्दा है, न कि हार्डवेयर का। एक बार इसके तय हो जाने के बाद हम अपने प्रोडक्ट को मांग के मुताबिक बाजार में उतारेंगे।'